महाभारत 7.64.14
ततोऽन्तक इव क्रुद्धः सवज्र इव वासवःदण्डपाणिरिवासह्यो मृत्युः कालेन चोदितः
tato'ntaka iva kruddhaḥ savajra iva vāsavaḥdaṇḍapāṇirivāsahyo mṛtyuḥ kālena coditaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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