महाभारत 7.64.3
अभिहारयत्सु शनकैर्भरतेषु युयुत्सुषुरौद्रे मुहूर्ते संप्राप्ते सव्यसाची व्यदृश्यत
abhihārayatsu śanakairbharateṣu yuyutsuṣuraudre muhūrte saṃprāpte savyasācī vyadṛśyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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