महाभारत 7.64.45
सभिण्डिपालाः सप्रासाः सशक्त्यृष्टिपरश्वधाःसनिर्यूहाः सनिस्त्रिंशाः सशरासनतोमराः
sabhiṇḍipālāḥ saprāsāḥ saśaktyṛṣṭiparaśvadhāḥsaniryūhāḥ sanistriṃśāḥ saśarāsanatomarāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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