महाभारत 7.64.5
मृगाश्च घोरसंनादाः शिवाश्चाशिवदर्शनाःदक्षिणेन प्रयातानामस्माकं प्राणदंस्तथा
mṛgāśca ghorasaṃnādāḥ śivāścāśivadarśanāḥdakṣiṇena prayātānāmasmākaṃ prāṇadaṃstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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