महाभारत 7.65.21
यन्त्रबद्धा विकवचा व्रणार्ता रुधिरोक्षिताःभ्रमत्सु युधि नागेषु मनुष्या विललम्बिरे
yantrabaddhā vikavacā vraṇārtā rudhirokṣitāḥbhramatsu yudhi nāgeṣu manuṣyā vilalambire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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