महाभारत 7.65.25
अतिविद्धाश्च नाराचैर्वमन्तो रुधिरं मुखैःमुहूर्तान्निपतन्त्यन्ये वारणा वसुधातले
atividdhāśca nārācairvamanto rudhiraṃ mukhaiḥmuhūrtānnipatantyanye vāraṇā vasudhātale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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