महाभारत 7.65.5
ततस्तव सुतो राजन्दृष्ट्वा सैन्यं तथागतम्दुःशासनो भृशं क्रुद्धो युद्धायार्जुनमभ्ययात्
tatastava suto rājandṛṣṭvā sainyaṃ tathāgatamduḥśāsano bhṛśaṃ kruddho yuddhāyārjunamabhyayāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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