महाभारत 7.66.4
भवान्पितृसमो मह्यं धर्मराजसमोऽपि चतथा कृष्णसमश्चैव सत्यमेतद्ब्रवीमि ते
bhavānpitṛsamo mahyaṃ dharmarājasamo'pi catathā kṛṣṇasamaścaiva satyametadbravīmi te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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