महाभारत 7.68.12सोऽतिविद्धो बलवता शत्रुणा शत्रुकर्शनःआजगाम परं मोहं मोहयन्केशवं रणेso'tividdho balavatā śatruṇā śatrukarśanaḥājagāma paraṃ mohaṃ mohayankeśavaṃ raṇeइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें