महाभारत 7.68.24
तौ च फल्गुनबाणौघैर्विबाहुशिरसौ कृतौवसुधामन्वपद्येतां वातनुन्नाविव द्रुमौ
tau ca phalgunabāṇaughairvibāhuśirasau kṛtauvasudhāmanvapadyetāṃ vātanunnāviva drumau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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