महाभारत 7.68.49
यथा स्थलं च निम्नं च न स्याद्वर्षति वासवेतथासीत्पृथिवी सर्वा शोणितेन परिप्लुता
yathā sthalaṃ ca nimnaṃ ca na syādvarṣati vāsavetathāsītpṛthivī sarvā śoṇitena pariplutā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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