महाभारत 7.69.55
स तस्यैव प्रसादाद्वै हन्यादेव रिपुर्बलीनागत्वा शंकरस्थानं भगवान्दृश्यते हरः
sa tasyaiva prasādādvai hanyādeva ripurbalīnāgatvā śaṃkarasthānaṃ bhagavāndṛśyate haraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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