महाभारत 7.69.5
अत्र बुद्ध्या समीक्षस्व किं नु कार्यमनन्तरम्अर्जुनस्य विघाताय दारुणेऽस्मिञ्जनक्षये
atra buddhyā samīkṣasva kiṃ nu kāryamanantaramarjunasya vighātāya dāruṇe'smiñjanakṣaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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