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महाभारत 7.69.60
मूर्तीरीक्षष्व नो देव प्रहारैर्जर्जरीकृताःशरणं त्वां प्रपन्नाः स्म गतिर्भव महेश्वर
mūrtīrīkṣaṣva no deva prahārairjarjarīkṛtāḥśaraṇaṃ tvāṃ prapannāḥ sma gatirbhava maheśvara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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