महाभारत 7.70.10
भारद्वाजानिलोद्धूतः शरधारासहस्रवान्अभ्यवर्षन्महारौद्रः पाण्डुसेनाग्निमुद्धतम्
bhāradvājāniloddhūtaḥ śaradhārāsahasravānabhyavarṣanmahāraudraḥ pāṇḍusenāgnimuddhatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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