महाभारत 7.70.19
यं यमार्छच्छरैर्द्रोणः पाण्डवानां रथव्रजम्ततस्ततः शरैर्द्रोणमपाकर्षत पार्षतः
yaṃ yamārchaccharairdroṇaḥ pāṇḍavānāṃ rathavrajamtatastataḥ śarairdroṇamapākarṣata pārṣataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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