महाभारत 7.70.35
भीमसेनं तु कौन्तेयं सोदर्याः पर्यवारयन्विविंशतिश्चित्रसेनो विकर्णश्च महारथः
bhīmasenaṃ tu kaunteyaṃ sodaryāḥ paryavārayanviviṃśatiścitraseno vikarṇaśca mahārathaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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