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महाभारत 7.71.16
समाश्वस्तस्तु वार्ष्णेयस्तव पुत्रं महारथम्विव्याध दशभिस्तूर्णं सायकैः कङ्कपत्रिभिः
samāśvastastu vārṣṇeyastava putraṃ mahārathamvivyādha daśabhistūrṇaṃ sāyakaiḥ kaṅkapatribhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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