महाभारत 7.71.23
उद्धुक्षितश्च पुत्रेण तव क्रोधहुताशनःय इमां पृथिवीं राजन्दग्धुं सर्वां समुद्यतः
uddhukṣitaśca putreṇa tava krodhahutāśanaḥya imāṃ pṛthivīṃ rājandagdhuṃ sarvāṃ samudyataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें