महाभारत 7.71.2
भारद्वाजं समासाद्य व्यूहस्य प्रमुखे स्थितम्अयोधयन्रणे पार्था द्रोणानीकं बिभित्सवः
bhāradvājaṃ samāsādya vyūhasya pramukhe sthitamayodhayanraṇe pārthā droṇānīkaṃ bibhitsavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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