महाभारत 7.71.4
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ विराटं दशभिः शरैःआजघ्नतुः सुसंक्रुद्धौ तव पुत्रहितैषिणौ
vindānuvindāvāvantyau virāṭaṃ daśabhiḥ śaraiḥājaghnatuḥ susaṃkruddhau tava putrahitaiṣiṇau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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