महाभारत 7.73.41
ततोऽन्यद्धनुरादाय द्रोणः क्षत्रियमर्दनःअस्त्रैरस्त्रविदां श्रेष्ठो योधयामास भारत
tato'nyaddhanurādāya droṇaḥ kṣatriyamardanaḥastrairastravidāṃ śreṣṭho yodhayāmāsa bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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