महाभारत 7.73.7शक्तिखड्गाशनिधरं क्रोधवेगसमुत्थितम्द्रोणमेघमनावार्यं हयमारुतचोदितम्śaktikhaḍgāśanidharaṃ krodhavegasamutthitamdroṇameghamanāvāryaṃ hayamārutacoditamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें