महाभारत 7.73.8
दृष्ट्वैवाभिपतन्तं तं शूरः परपुरंजयःउवाच सूतं शैनेयः प्रहसन्युद्धदुर्मदः
dṛṣṭvaivābhipatantaṃ taṃ śūraḥ parapuraṃjayaḥuvāca sūtaṃ śaineyaḥ prahasanyuddhadurmadaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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