महाभारत 7.74.23
तयोस्तु भृशसंक्रुद्धः शराभ्यां पाण्डुनन्दनःचिच्छेद धनुषी तूर्णं भूय एव धनंजयः
tayostu bhṛśasaṃkruddhaḥ śarābhyāṃ pāṇḍunandanaḥciccheda dhanuṣī tūrṇaṃ bhūya eva dhanaṃjayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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