महाभारत 7.74.58
ततः प्रहस्य गोविन्दः साधु साध्वित्यथाब्रवीत्शरवेश्मनि पार्थेन कृते तस्मिन्महारणे
tataḥ prahasya govindaḥ sādhu sādhvityathābravītśaraveśmani pārthena kṛte tasminmahāraṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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