महाभारत 7.75.21
क्रोशतां यतमानानामसंसक्तौ परंतपौदर्शयित्वात्मनो वीर्यं प्रयातौ सर्वराजसु
krośatāṃ yatamānānāmasaṃsaktau paraṃtapaudarśayitvātmano vīryaṃ prayātau sarvarājasu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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