महाभारत 7.77.32
शोकमीयुः परं चैव कुरवः सर्व एव तेअमन्यन्त च पुत्रं ते वैश्वानरमुखे हुतम्
śokamīyuḥ paraṃ caiva kuravaḥ sarva eva teamanyanta ca putraṃ te vaiśvānaramukhe hutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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