महाभारत 7.78.14
जानंस्त्वमपि वै कृष्ण मां विमोहयसे कथम्यद्वृत्तं त्रिषु लोकेषु यच्च केशव वर्तते
jānaṃstvamapi vai kṛṣṇa māṃ vimohayase kathamyadvṛttaṃ triṣu lokeṣu yacca keśava vartate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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