महाभारत 7.78.26
ततः क्रुद्धो रणे पार्थः सृक्कणी परिसंलिहन्नापश्यत ततोऽस्याङ्गं यन्न स्याद्वर्मरक्षितम्
tataḥ kruddho raṇe pārthaḥ sṛkkaṇī parisaṃlihannāpaśyata tato'syāṅgaṃ yanna syādvarmarakṣitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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