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महाभारत 7.79.2
सुवर्णचित्रैर्वैयाघ्रैः स्वनवद्भिर्महारथैःदीपयन्तो दिशः सर्वा ज्वलद्भिरिव पावकैः
suvarṇacitrairvaiyāghraiḥ svanavadbhirmahārathaiḥdīpayanto diśaḥ sarvā jvaladbhiriva pāvakaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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