Loading
महाभारत 7.79.32
भूरिश्रवास्तु संक्रुद्धः प्रतोदं चिच्छिदे हरेःअर्जुनं च त्रिसप्तत्या बाणानामाजघान ह
bhūriśravāstu saṃkruddhaḥ pratodaṃ cicchide hareḥarjunaṃ ca trisaptatyā bāṇānāmājaghāna ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें