महाभारत 7.8.26
न ह्यन्यं परिपश्यामि वधे कंचन शुष्मिणःधृष्टद्युम्नादृते रौद्रात्पाल्यमानात्किरीटिना
na hyanyaṃ paripaśyāmi vadhe kaṃcana śuṣmiṇaḥdhṛṣṭadyumnādṛte raudrātpālyamānātkirīṭinā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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