महाभारत 7.80.12
हस्तिकक्ष्या पुनर्हैमी बभूवाधिरथेर्ध्वजेआहवे खं महाराज ददृशे पूरयन्निव
hastikakṣyā punarhaimī babhūvādhiratherdhvajeāhave khaṃ mahārāja dadṛśe pūrayanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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