महाभारत 7.80.7इन्द्रायुधसवर्णाभाः पताका भरतर्षभदोधूयमाना रथिनां शोभयन्ति महारथान्indrāyudhasavarṇābhāḥ patākā bharatarṣabhadodhūyamānā rathināṃ śobhayanti mahārathānइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें