महाभारत 7.81.17तयोः समभवद्युद्धं नरराक्षसयोर्मृधेयादृगेव पुरा वृत्तं रामरावणयोर्नृपtayoḥ samabhavadyuddhaṃ nararākṣasayormṛdheyādṛgeva purā vṛttaṃ rāmarāvaṇayornṛpaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें