महाभारत 7.81.18
ततो युधिष्ठिरो द्रोणं नवत्या नतपर्वणाम्आजघ्ने भरतश्रेष्ठ सर्वमर्मसु भारत
tato yudhiṣṭhiro droṇaṃ navatyā nataparvaṇāmājaghne bharataśreṣṭha sarvamarmasu bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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