महाभारत 7.81.25
केचिच्चैनममन्यन्त तथा वै विमुखीकृतम्हृतो राजेति राजेन्द्र ब्राह्मणेन यशस्विना
keciccainamamanyanta tathā vai vimukhīkṛtamhṛto rājeti rājendra brāhmaṇena yaśasvinā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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