महाभारत 7.81.38
ते गदे सहसा मुक्ते समासाद्य परस्परम्संघर्षात्पावकं मुक्त्वा समेयातां महीतले
te gade sahasā mukte samāsādya parasparamsaṃgharṣātpāvakaṃ muktvā sameyātāṃ mahītale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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