महाभारत 7.82.10
तौ परस्परमासाद्य शरदंष्ट्रौ तरस्विनौशरैरनेकसाहस्रैरन्योन्यमभिजघ्नतुः
tau parasparamāsādya śaradaṃṣṭrau tarasvinauśarairanekasāhasrairanyonyamabhijaghnatuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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