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महाभारत 7.82.39
ततो द्रोणो भृशं क्रुद्धः सहसोद्वृत्य चक्षुषीसात्यकिं सत्यकर्माणं स्वयमेवाभिदुद्रुवे
tato droṇo bhṛśaṃ kruddhaḥ sahasodvṛtya cakṣuṣīsātyakiṃ satyakarmāṇaṃ svayamevābhidudruve
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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