महाभारत 7.83.7
आर्जुनिस्तु हयांस्तस्य चतुर्भिर्निशितैः शरैःप्रेषयामास संक्रुद्धो यमस्य सदनं प्रति
ārjunistu hayāṃstasya caturbhirniśitaiḥ śaraiḥpreṣayāmāsa saṃkruddho yamasya sadanaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें