महाभारत 7.85.32
तेषां समभवच्छब्दो वध्यतां द्रोणसायकैःवनौकसामिवारण्ये दह्यतां धूमकेतुना
teṣāṃ samabhavacchabdo vadhyatāṃ droṇasāyakaiḥvanaukasāmivāraṇye dahyatāṃ dhūmaketunā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें