महाभारत 7.85.43
यो हि प्रीतमना नित्यं यश्च नित्यमनुव्रतःस कार्ये सांपराये तु नियोज्य इति मे मतिः
yo hi prītamanā nityaṃ yaśca nityamanuvrataḥsa kārye sāṃparāye tu niyojya iti me matiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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