महाभारत 7.86.24आचार्यो लघुहस्तत्वादभेद्यकवचावृतःउपलभ्य रणे क्रीडेद्यथा शकुनिना शिशुःācāryo laghuhastatvādabhedyakavacāvṛtaḥupalabhya raṇe krīḍedyathā śakuninā śiśuḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें