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महाभारत 7.86.29
ये च कर्णमुखा राजन्रथोदाराः प्रकीर्तिताःएतेऽर्जुनस्य क्रुद्धस्य कलां नार्हन्ति षोडशीम्
ye ca karṇamukhā rājanrathodārāḥ prakīrtitāḥete'rjunasya kruddhasya kalāṃ nārhanti ṣoḍaśīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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