महाभारत 7.86.32
यत्र वीरौ महेष्वासौ कृष्णौ सत्यपराक्रमौन तत्र कर्मणो व्यापत्कथंचिदपि विद्यते
yatra vīrau maheṣvāsau kṛṣṇau satyaparākramauna tatra karmaṇo vyāpatkathaṃcidapi vidyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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