महाभारत 7.86.4
एवंविधे तथा काले मादृशं प्रेक्ष्य संमतम्वक्तुमर्हसि राजेन्द्र यथा पार्थं तथैव माम्
evaṃvidhe tathā kāle mādṛśaṃ prekṣya saṃmatamvaktumarhasi rājendra yathā pārthaṃ tathaiva mām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें