महाभारत 7.86.7
सुयोधनबलं त्वद्य योधयिष्ये समन्ततःविजेष्ये च रणे राजन्सत्यमेतद्ब्रवीमि ते
suyodhanabalaṃ tvadya yodhayiṣye samantataḥvijeṣye ca raṇe rājansatyametadbravīmi te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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