महाभारत 7.88.36
एतावदुक्त्वा यन्तारं ब्रह्माणं परिवर्जयन्स व्यतीयाय यत्रोग्रं कर्णस्य सुमहद्बलम्
etāvaduktvā yantāraṃ brahmāṇaṃ parivarjayansa vyatīyāya yatrograṃ karṇasya sumahadbalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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